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आईबीए के अड़ियल रैवये से नाराज बैंकर्स आज फिर उतरे सड़क पर – ललित अग्रवाल

छत्तीसगढ़ बिलासपुर/ आईबीए द्वारा 1 नवम्बर 2017 से देय 11वे वेतन समझौते को पूर्ण करने के बजाय जनता को भी  गुमराह  कर रहा हैI  जबकि सच्चाई यह हैं कि 28 माह से अधिक समय मे बैंक  कर्मचारियों के  संगठन के  साथ  28  दौर की वार्ता  के  पश्चात उनके द्वारा कुल व्यय में  मूल वेतन में केवल 2% बढ़ोतरी ही प्रस्तावित हैं।

 

आइबोक के महासचिव ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महोदय को पत्र लिखकर 8 फरवरी 2020 की लोक अदालत को स्थगित करने का निवेदन किया हैं। पत्र में माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय को अवगत कराया गया हैं कि जायज मांगों यथा सम्मानजनक वेतन वृद्धि, पांच दिनों का कार्यसप्ताह,  निर्धारित कार्यावधि, पेंशन व फैमली पेंशन में सुधार आदि पर ध्यान नही देने के कारण 20 जनवरी से आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होकर युनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले देश के दस लाख बैंक कर्मचारी व अधिकारी विगत 31 जनवरी व 1 फरवरी को हड़ताल पर थे। आगामी 11,12 व 13 मार्च को तीन दिनों के लिए तथा 1 अप्रेल से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने हेतु मजबूर हैं।  वर्क टू रूल चालू रहने के कारण  देश के चार लाख बैंक अधिकारी  प्रबंधन से अतिरिक्त सहयोग वापस लेते हुए अवकाश पर कार्य नही करने का निर्णय लिए हैं। चूंकि लोक अदालत भी द्वितीय शनिवार अवकाश को ही हैं।  माननीय न्यायालय व देश के सविंधान का पूर्ण आदर व सम्मान करते हुए माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय से निवेदन हैं कि इसे स्थगित करने की कृपा करें।

 

आज दिनभर जनता की सेवा करने के बाद शाम 6 बजे से बड़ी संख्या में बैंकर्स पंजाब नैशनल बैंक दयालबंद शाखा के सामने एकत्रित होकर विरोध प्रकट किये। आज की सभा मे केंद्रीय सरकार से भारतीय जीवन बीमा निगम के निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की गई।

 

आज के प्रदर्शन में सर्वश्री  शैलेन्द्र गोवर्धन,एनवी राव, डी के हाटी, जितेंद्र शुक्ला, अशोक ठाकुर, मनोज मिरी,  प्रल्हाद अग्रवाल, दीपा टण्डन, सोनालिका मिश्रा सहित बड़ी संख्या में हड़ताली कर्मचारी व अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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