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अमेरिका में फंसी गर्भवती महिला को वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को कहा है कि वह अमेरिका में फंसी गर्भवती महिला को शीघ्र वापस लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए। महिला ने 13 मई को ही विमान के जरिए भारत वापस लाने के लिए निर्देश देने की मांग की थी। जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ” हम कोई आदेश जारी नहीं कर रहे, लेकिन आप इस संबंध में जरूरी कदम उठाएं इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील संजय एम नुली ने पीठ को बताया कि बुधवार 13 मई को ही विमान सेवा से भारतीयों को वापस लाया जाना है, इसलिए अदालत केंद्र को इसके निर्देश जारी करे। दरअसल तीन महीने से अधिक समय तक अमेरिका में फंसी बेंगलुरु की एक महिला, उसके पति और उनकी 18 महीने की बेटी ने 13 मई को USA से एयर इंडिया की फ्लाइट लेने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महिला ने कहा है कि कोई भी देरी उसकी सेहत पर बुरा असर डालेगी क्योंकि उसका गर्भावस्था का उन्नत चरण है।. याचिका में पूजा चौधरी, उनके पति विकास और बेटी विहाना ने शीर्ष अदालत को यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है कि वे 13 मई, 2020 को सैन फ्रांसिस्को से प्रस्थान करने या अगले संभावित संभावित अवसर पर उड़ान के माध्यम से USA से वापस आ सकें। उन्होंने कहा कि ” यह सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है कि याचिकाकर्ता, जो गर्भवती है और संयुक्त राज्य अमेरिका में एक असुरक्षित स्थिति में फंस गयी है, उसे समय पर भारत वापस लाया जाए और उचित उपचार दिया जाए क्योंकि यह न केवल याचिकाकर्ता के जीवन का प्रश्न है, बल्कि अजन्मे बच्चे का भी।” वकील संजय एम नुली के माध्यम से की गई एक संयुक्त याचिका में याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार को उचित चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भी एक निर्देश देने की मांग की है, जब तक कि उसे भारत में वापस नहीं लाया जाता क्योंकि उसकी अनुपस्थिति उसके और भ्रूण दोनों के लिए घातक साबित होगी। याचिकाकर्ताओं ने बताया है कि उच्चतम न्यायालय की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने शुक्रवार को ही केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह संयुक्त अरब अमीरात में फंसे कुछ डॉक्टरों और नर्सों के मामले में गर्भावस्था के उन्नत चरण पर विचार करे। समानता के सिद्धांत के आधार पर जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत निहित है, उन्हें राहत के साथ अनुमति दी जानी चाहिए। महिला ने कहा है कि वह अपने बच्चे को भारत में पहुंचाना चाहती है और व्यापारिक यात्रा के बाद वहां फंसे होने के कारण उसे अमेरिका से निकाल दिया गया और वो बेंगलुरु में अपने निवास पर वापस जाना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि वह मनोवैज्ञानिक रूप से इस तथ्य को लेकर पीड़ित रही हैं कि वह 17 जुलाई के आसपास संभावित डिलीवरी तारीख के साथ USA में फंसी हुई हैं। यदि उसकी निकासी में देरी होगी तो उसे गर्भावस्था के उन्नत चरण के कारण उड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। याचिकाकर्ताओं ने निकासी के लिए अमेरिका में दूतावास सहित संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन उनका नाम निर्धारित उड़ान में शामिल नहीं किया गया है ।

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